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Steel News

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Companies will have trouble, cenvat rulesis strick General

क्या हुआ
:    वित्त मंत्रालय ने सेनवैट क्रेडिट रूल्स 2004 में कर दिया है परिवर्तन
क्या बदलाव
:    अब से उन उद्योगपतियों को सेनवैट क्रेडिट की वापसी करनी होगी जो उत्पाद में खराबी होने की वजह से पूरा का पूरा लॉट कर देते हैं स्क्रैप
:    अब यदि किसी लॉट का सामान नष्ट किया जाता है तो हर महीने केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग को देनी होगी इसकी जानकारी

सेनवैट क्रेडिट का लाभ ले रहे उद्यमियों को अब थोड़ी सी दिक्कत होगी क्योंकि वित्त मंत्रालय ने सेनवैट क्रेडिट रूल्स 2004 में परिवर्तन कर दिया है। अब से उन उद्योगपतियों को सेनवैट क्रेडिट की वापसी करनी होगी जो उत्पाद में खराबी होने की वजह से पूरा का पूरा लॉट स्क्रैप कर देते हैं।

केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने सेनवैट क्रेडिट रूल्स 2004 के नियम 3 में परिवर्तन कर दिया है। सीबीईसी के एक अधिकारी ने 'बिजनेस भास्कर' के साथ बातचीत में बताया कि सेनवैट क्रेडिट नियम के तहत उद्यमियों को तीन मदों में क्रेडिट मिलता है जिनमें इनपुट, कैपिटल गुड्स और इनपुट सर्विसेज शामिल हैं।

किसी कंपनी में जब किसी लॉट का माल खराब हो जाता है तो वह बाजार में अपने साख की रक्षा के लिए पूरे लॉट को बाजार में नहीं भेजती है। यदि भूलवश कोई माल बाजार में चला भी गया है तो वह वापस मंगा कर उसे नष्ट कर देती है।

कुछ उत्पादक ऐसे माल को सेकेंड हैंड माल के रूप में बेच देते हैं। वैसे उद्यमी इस नियम के तहत नहीं आएंगे। इसमें वही उद्यमी आएंगे जो पूरे लॉट को नष्ट कर देते हैं। ऐसी स्थिति में वे इनपुट और कैपिटल गुड्स पर तो सेनवैट क्रेडिट की वापसी कर देते हैं, लेकिन इनपुट सर्विसेज पर सेनवैट  क्रेडिट की वापसी नहीं करते हैं।

इनपुट सर्विसेज का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अगर कोई कंपनी बाहर से परिवहन सेवाएं लेती है, जेनरेटर सेवा लेती है, मैनपावर सेवा या कोई अन्य सेवा लेती है तो उस पर भी क्रेडिट मिलता है। अब तो ऐसा चलन शुरू हो गया है कि कंपनियां बाहर से कर्मचारियों या सिक्युरिटी स्टाफ लेती हैं।

अब यदि किसी लॉट का सामान नष्ट किया जाता है तो हर महीने इसकी जानकारी केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग को देनी होगी। इसमें कोई लेट-लतीफी नहीं चलेगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से मासिक रिटर्न दाखिल किया जाता है, उसी तरह से मासिक जानकारी भी देनी होगी कि कितने लॉट का माल नष्ट किया गया है और इस पर कितनी राशि इनपुट सर्विसेज मद में खर्च की गई है।


जानकारों का कहना है कि इस तरह नियमों में बदलाव होने से बड़ी कंपनियों पर तो असर पडऩा तय है क्योंकि ऐसी कंपनियां अपने साख की रक्षा के लिए गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करती हैं। इसके साथ ही लघु उद्यमियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उनके यहां भी इस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

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