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Steel News

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Steel units faces difficulties due to expensive scrap General

ब्यूरो : जयपुर... दीपावली भी निकल गई और विधानसभा चुनाव भी निपट गए, लेकिन स्टील की मांग में सुधार अब तक दिखाई नहीं दिया। ऐसे में डॉलर के दाम फिर से 62 रुपये से ऊपर निकलने से स्क्रैप का भाव एक से डेढ़ हजार रुपये टन बढ़ गया। तमाम कारणों से स्टील इकाइयों की दशा और बिगड़ी है। राजस्थान की स्टील इकाइयों की दशा करीब डेढ़ साल से खराब है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में जारी आदेश के चलते प्रदेश की स्टील इकाइयों से स्टील की खरीद को बंद कर दिया गया था। इसी बीच रियल एस्टेट में मंदी से आवासीय परियोजनाओं के लिए भी स्टील खरीद में कमी आई।

29,000 टन हो गई स्क्रैप की कीमत डॉलर के मूल्य के हिसाब से
11 रोलिंग मिलें व 50 इंडक्शन फर्नेश इकाइयां डेढ़ साल से मुश्किल में फंसी हैं राजस्थान में
50% सरकारी विभागों को स्टील की आपूर्ति होती थी स्थानीय स्टील इकाइयों के उत्पादन का

 

स्टील इकाइयों पर दोहरी मार

स्थानीय इकाइयों से स्टील की सरकारी खरीद बंद होने से इकाइयों के लिए माल खपना मुश्किल हुआ। इससे फिनिश स्टील की कीमतों में भी कमी आई, लेकिन डॉलर की मजबूती से स्क्रैप महंगा हुआ और लागत भी बढ़ गई। इस तरह स्टील इकाइयों पर दोहरी मार पड़ी है। हालांकि पिछले एक महीने के दौरान फिनिश स्टील की कीमतों में एक हजार रुपये टन की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसका लाभ स्टील इकाइयों को नहीं मिला है। स्क्रैप की किल्लत है। औद्योगिक उत्पादन धीमा होने से औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले स्क्रैप में कमी आई है, जबकि डॉलर के महंगा होने से आयातकों ने स्क्रैप का आयात कम कर दिया है। 

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